सत्संग-माला | Satsang Mala

सत्संग-माला | Satsang Mala

सत्संग-माला | Satsang Mala के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : सत्संग-माला है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Hanuman Prasad Poddar | Hanuman Prasad Poddar की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 24.7 MB है | पुस्तक में कुल 104 पृष्ठ हैं |नीचे सत्संग-माला का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | सत्संग-माला पुस्तक की श्रेणियां हैं : Spirituality -Adhyatm

Name of the Book is : Satsang Mala | This Book is written by Hanuman Prasad Poddar | To Read and Download More Books written by Hanuman Prasad Poddar in Hindi, Please Click : | The size of this book is 24.7 MB | This Book has 104 Pages | The Download link of the book "Satsang Mala " is given above, you can downlaod Satsang Mala from the above link for free | Satsang Mala is posted under following categories Spirituality -Adhyatm |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 24.7 MB
कुल पृष्ठ : 104

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१–सत्य और प्रिय वाणी बोलनी चाहिये, असत्य और प्रिय नहीं । इसी प्रकार सत्य और अप्रिय भी नहीं बोलना चाहिये । जीव अनेक जन्मोंके संस्कारके कारण अप्रिय और असत्य बोलता है । वे संस्कार प्रयत्नसे हट सकते हैं । अतः सत्य और प्रिय बोलनेका अभ्यास करना चाहिये । चिन्ता रखकर अभ्यास करना और सत्य एवं प्रिय बोलनेमें कोई हानि हो जाय तो उसे सह लेना चाहिये । सत्य और प्रिय बोलनेकी स्थिति न हो तो मौन रहना चाहिये और उस मौन रहनेमें यदि हानि हो तो उसे सह लेना चाहिये; परंतु सत्य और प्रिय बोलनेके नियमका त्याग कभी नहीं करना चाहिये । जो इस ( सत्य और प्रिय बोलनेके ) नियमका दृढ़तासे पालन करेगा, उसे सुख, शान्ति, सम्पत्ति प्राप्त होगी, यश मिलेगा और निष्कामभावसे पालन करनेपर मुक्ति मिलेगी। जबतक जीवन रहे, तबतक इस नियमका पालन करना चाहिये । इस नियममें बहुत ही बल है ।

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