नारी जीवन | Nari jivan

नारी जीवन | Nari jivan

नारी जीवन | Nari jivan के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : नारी जीवन है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Shanti Jain | Shanti Jain की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 7.58 MB है | पुस्तक में कुल 298 पृष्ठ हैं |नीचे नारी जीवन का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | नारी जीवन पुस्तक की श्रेणियां हैं : Stories, Novels & Plays

Name of the Book is : Nari jivan | This Book is written by Shanti Jain | To Read and Download More Books written by Shanti Jain in Hindi, Please Click : | The size of this book is 7.58 MB | This Book has 298 Pages | The Download link of the book "Nari jivan" is given above, you can downlaod Nari jivan from the above link for free | Nari jivan is posted under following categories Stories, Novels & Plays |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 7.58 MB
कुल पृष्ठ : 298

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

भारतीय-सस्कृति ने नारी को सदैव समाननीय स्थान पर प्रतिष्ठित किया है । जिसकी साक्षी-यत्र नार्यस्नु पूजयन्ते रमन्ते तत्र देवता' जैसी सूक्तियां हैं । किन्तु आज भारतीय नारी अपने महत्त्व को, मातृत्व की गरिमा को और, देश समाज का कल्याण करने वाले आदर्शों को विस्मृत करती जा रही है । वह बालक को जन्म देने वाली जननी ही नहीं बल्कि गुरु भी है । उसके द्वारा डाने गये संस्कार संतान के भावी विकास के लिये पाथेय हैं । अत नारीजाति की यह दुहरी जिम्मेदारी है कि वह वर्तमान को उपस्थित करने के साथ-साथ भविष्य निर्माण के लिये कृतस काल्प बने ।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.