नास्तिक आस्तिक वाद | Nastik Astik Vaad

नास्तिक आस्तिक वाद | Nastik Astik Vaad

नास्तिक आस्तिक वाद | Nastik Astik Vaad के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : नास्तिक आस्तिक वाद है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Swami Karpatri Ji | Swami Karpatri Ji की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 3.2 MB है | पुस्तक में कुल 34 पृष्ठ हैं |नीचे नास्तिक आस्तिक वाद का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | नास्तिक आस्तिक वाद पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm

Name of the Book is : Nastik Astik Vaad | This Book is written by Swami Karpatri Ji | To Read and Download More Books written by Swami Karpatri Ji in Hindi, Please Click : | The size of this book is 3.2 MB | This Book has 34 Pages | The Download link of the book "Nastik Astik Vaad" is given above, you can downlaod Nastik Astik Vaad from the above link for free | Nastik Astik Vaad is posted under following categories dharm |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 3.2 MB
कुल पृष्ठ : 34

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

परन्तु ईश्वर यदि सत्य वस्तु है तो किसी के चाहने या न चाहने से उनका कुछ भी बिगड़ नहीं सकता। भले ही चमगादड़ों को सूर्य का प्रखर प्रकाश असत्, अनावश्यक एवं हानिकारक प्रतीक हो, परन्तु एतावता सूर्य अतत् अनावश्यक,एवं हानिकारक सिद्ध नहीं होते। वैसे किसी को ईश्वर भी भले अतत् फिर भी उसको प्रचण्ड सत्ता का अपलाप होना असम्भव है। वस्तुतः सूर्यनारायण से भी अधिक सूर्यचन्द्र का भी भासक ईश्वर एक स्वतः सिद्ध सर्वमान्य वस्तु है।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.