पढ़ो समझो और करो | Padho Samjho aur Karo

पढ़ो समझो और करो : गीता प्रेस | Padho Samjho aur Karo By Geeta Press

पढ़ो समझो और करो : गीता प्रेस | Padho Samjho aur Karo By Geeta Press के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : पढ़ो समझो और करो है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Geeta Press | Geeta Press की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 3.4 MB है | पुस्तक में कुल 150 पृष्ठ हैं |नीचे पढ़ो समझो और करो का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | पढ़ो समझो और करो पुस्तक की श्रेणियां हैं : children, gita-press, inspirational, Knowledge, women

Name of the Book is : Padho Samjho aur Karo | This Book is written by Geeta Press | To Read and Download More Books written by Geeta Press in Hindi, Please Click : | The size of this book is 3.4 MB | This Book has 150 Pages | The Download link of the book "Padho Samjho aur Karo" is given above, you can downlaod Padho Samjho aur Karo from the above link for free | Padho Samjho aur Karo is posted under following categories children, gita-press, inspirational, Knowledge, women |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी : , , , ,
पुस्तक का साइज : 3.4 MB
कुल पृष्ठ : 150

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

उसने कहा---एक दिन मैं झोपड़ीमें बैठा था, उघरसे एक नवयुवती ती निकली। उसे देखकर मेरा मन चञ्चल हो गया और मैं उसे अच्छी तरह देखनेके लिये खड़ा हुआ । ज्यों ही मैंने अपना एक पैर झोपड़ीके बाहर रखा, त्य ही आकाशवाणी सुनायी दी-अरे साधु ! तुझे जरा भी शर्म नहीं आती । तु तीस सालले एकान्तमें भजन कर रहा है और भक्के मामले विख्यात है। इतनेपर भी आज दु शैतानकै फेदैमें फँसने जा रहा है ।
यह सुनते ही मेरा शरीर कॉप वा । जो ग झोपडीके इर निकला था, उसको मैंने तुरंत काटकर फेंक दिया, तब यहीं बैठा हैं और प्रभु की लीला देखता हैं !!

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.