पराया | Paraya

पराया : लक्ष्मण माने | Paraya : Laxman Mane

पराया : लक्ष्मण माने | Paraya : Laxman Mane के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : पराया है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Laxman Mane | Laxman Mane की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 4 MB है | पुस्तक में कुल 66 पृष्ठ हैं |नीचे पराया का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | पराया पुस्तक की श्रेणियां हैं : Biography, Stories, Novels & Plays

Name of the Book is : Paraya | This Book is written by Laxman Mane | To Read and Download More Books written by Laxman Mane in Hindi, Please Click : | The size of this book is 4 MB | This Book has 66 Pages | The Download link of the book "Paraya" is given above, you can downlaod Paraya from the above link for free | Paraya is posted under following categories Biography, Stories, Novels & Plays |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी : ,
पुस्तक का साइज : 4 MB
कुल पृष्ठ : 66

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गाँव के बाहर गधे खोल दिये थे। उन जानवरों के पीछेपीछे उन्हें सोंटा लगाते हम खेलते होते । मैदान पर पड़े खप्परों के 'जूठे टुकड़ों से लगोरी या तो गोटियां खेला करते । शरीर पर मांगकर लाई कमीज़ होती । उस पर पैबंद होते और वह मुहीतुदी होती । उसी में सारा शरीर के शाता । चहीं का ठिकाना ही न था । सारा काम घुटने तक कमीज ही कर ली।
आस्तीने आय के नाप की कभी न होतीं । उसका उपयोग बहती नाक पर्पोछने के लिए होता। सिर पर या तो बाप की टोपी होती या भीख में मिली टोपी । तेज हवाएँ परेशान करतीं, टोपी सिर पर ठहरती ही न थी | खग्या, इंद्या, मारुति और मैं कूड़े के ढेर के पास या टट्टीमैदान में खेला करते ।।

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