पाश्चात्य शिक्षा का इतिहास | Pashchatya Shiksha Ka Itihas

पाश्चात्य शिक्षा का इतिहास | Pashchatya Shiksha Ka Itihas

पाश्चात्य शिक्षा का इतिहास | Pashchatya Shiksha Ka Itihas के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : पाश्चात्य शिक्षा का इतिहास है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Narayan Singh | Narayan Singh की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 26.09 MB है | पुस्तक में कुल 496 पृष्ठ हैं |नीचे पाश्चात्य शिक्षा का इतिहास का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | पाश्चात्य शिक्षा का इतिहास पुस्तक की श्रेणियां हैं : history

Name of the Book is : Pashchatya Shiksha Ka Itihas | This Book is written by Narayan Singh | To Read and Download More Books written by Narayan Singh in Hindi, Please Click : | The size of this book is 26.09 MB | This Book has 496 Pages | The Download link of the book "Pashchatya Shiksha Ka Itihas" is given above, you can downlaod Pashchatya Shiksha Ka Itihas from the above link for free | Pashchatya Shiksha Ka Itihas is posted under following categories history |


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पुस्तक का साइज : 26.09 MB
कुल पृष्ठ : 496

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एक युग की निद्रा के बाद जगे हुए भारत की राष्ट्रभाषा बनने का गौरवपूर्ण भार हिन्दी को वहन करना है । सरकारी कार्यालयों में हिन्दी का प्रयोग होने लग जाय केवल इतने से काम नहीं चलेगा; इस उत्तरदायित्व का निर्वाह करने के लिये यह आवश्यक है कि हिन्दी का वाङ्गमय अत्यन्त समृद्ध हो, नवोदित राष्ट्र की जान-पिपासा शान्त करने की इसमें क्षमता हो तथा विश्वविद्यालयों का शिक्षण -माध्यम बनने की इसमें योग्यता हो । किसी भी विषय में हर श्रेणी की अच्छी पाठ्य-पुस्तकों के अतिरिक्त उच्च-कोटि का गवेषणात्मक साहित्य भी अवश्य होना चाहिये । गवेषणात्मक अथबा सृजनात्मक साहित्य के अभाव में 'भापा का विकास रुक जाता है, उसकी गति कुण्ठित हो जाती है।

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