पिछड़ी अर्थव्यवस्था का विकास नियोजन आजमगढ़ तहसील (उत्तर प्रदेश ) का एक संदर्भित अध्ययन | Pichhadi Arthavyvastha ka Vikas Niyojan Ajamagadh Tahasil (Uttar Pradesh ) ka ek sandarbhait adhayayan

पिछड़ी अर्थव्यवस्था का विकास नियोजन आजमगढ़ तहसील(उत्तर प्रदेश)का एक संदर्भित अध्ययन| Pichhadi Arthavyvastha ka Vikas Niyojan Ajamagadh Tahasil (Uttar Pradesh ) ka Ek Sandarbhit Adhyayan

पिछड़ी अर्थव्यवस्था का विकास नियोजन आजमगढ़ तहसील(उत्तर प्रदेश)का एक संदर्भित अध्ययन| Pichhadi Arthavyvastha ka Vikas Niyojan Ajamagadh Tahasil (Uttar Pradesh ) ka Ek Sandarbhit Adhyayan के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : पिछड़ी अर्थव्यवस्था का विकास नियोजन आजमगढ़ तहसील (उत्तर प्रदेश ) का एक संदर्भित अध्ययन है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Omprakash Khandelwal | Omprakash Khandelwal की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 21.3 MB है | पुस्तक में कुल 315 पृष्ठ हैं |नीचे पिछड़ी अर्थव्यवस्था का विकास नियोजन आजमगढ़ तहसील (उत्तर प्रदेश ) का एक संदर्भित अध्ययन का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | पिछड़ी अर्थव्यवस्था का विकास नियोजन आजमगढ़ तहसील (उत्तर प्रदेश ) का एक संदर्भित अध्ययन पुस्तक की श्रेणियां हैं : society

Name of the Book is : Pichhadi Arthavyvastha ka Vikas Niyojan Ajamagadh Tahasil (Uttar Pradesh ) ka ek sandarbhait adhayayan | This Book is written by Omprakash Khandelwal | To Read and Download More Books written by Omprakash Khandelwal in Hindi, Please Click : | The size of this book is 21.3 MB | This Book has 315 Pages | The Download link of the book " Pichhadi Arthavyvastha ka Vikas Niyojan Ajamagadh Tahasil (Uttar Pradesh ) ka ek sandarbhait adhayayan" is given above, you can downlaod Pichhadi Arthavyvastha ka Vikas Niyojan Ajamagadh Tahasil (Uttar Pradesh ) ka ek sandarbhait adhayayan from the above link for free | Pichhadi Arthavyvastha ka Vikas Niyojan Ajamagadh Tahasil (Uttar Pradesh ) ka ek sandarbhait adhayayan is posted under following categories society |


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भारत गॉवों में बसता है । प्राचीन काल से ही हमारे गॉव, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक | व्यवस्था के प्रमुख आधार रहे है, किन्तु विज्ञान के बढ़ते प्रभाव ने अब यह स्थान नगरों को प्रदान कर दिया है । आज का भारत अपनी श्री-बृद्धि हेतु नगराश्रित हो गया है । आर्थिक उत्थान की सम्पूर्ण संभावनाओं से सम्पुष्ट नगरों ने भारतीय गाँवों को मात्र कच्चे माल के उत्पादन एवं निर्मित माल के उपभोग तक ही सीमित कर दिया है । आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक सुविधाओं की बहाली द्वारा ग्राम्य-जीवन को खुशहाली प्रदान करने के लिए ही 1 अप्रैल, 1951 से पचवर्षीय योजनाओं का क्रियान्वयन किया गया सच तो यह है कि ग्राम-समृद्धि ही हमारी राष्ट्रीय समृद्धि है । स्वतन्तोपरान्त पर्याप्त प्रयास के बाद भी क्षेत्रीय विभिन्नताओ और असमानताओं ने, राष्ट्रीय योजनाओं की परिकल्पनाओ को साकार नहीं होने दिया । अत. विभिन्न क्षेत्रों के लिए, उनकी भौगोलिक पृष्ठभूमि में विशिष्ठ योजनाओं की आवश्यकताओं का अनुभव किया गया । परिणाम स्वरुप, चतुर्थ पंचवर्षीय योजना द्वारा विकास-खण्ड से लेकर राज्यस्तरीय आर्थिक नियोजन को गति प्रदान की गयी ।

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