ऋग्वेदके बनानेवाले ऋषि | Rigvedke Bananewale Rishi

ऋग्वेदके बनानेवाले ऋषि | Rigvedke Bananewale Rishi

ऋग्वेदके बनानेवाले ऋषि | Rigvedke Bananewale Rishi के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : ऋग्वेदके बनानेवाले ऋषि है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Babu Surajbhanu Ji | Babu Surajbhanu Ji की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 3 MB है | पुस्तक में कुल 142 पृष्ठ हैं |नीचे ऋग्वेदके बनानेवाले ऋषि का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | ऋग्वेदके बनानेवाले ऋषि पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm

Name of the Book is : Rigvedke Bananewale Rishi | This Book is written by Babu Surajbhanu Ji | To Read and Download More Books written by Babu Surajbhanu Ji in Hindi, Please Click : | The size of this book is 3 MB | This Book has 142 Pages | The Download link of the book "Rigvedke Bananewale Rishi" is given above, you can downlaod Rigvedke Bananewale Rishi from the above link for free | Rigvedke Bananewale Rishi is posted under following categories dharm |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 3 MB
कुल पृष्ठ : 142

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स्वामी दयानन्द सरस्वती ने ऋग्वेदादि भाष्य भूमिका में लिखा है कि ईश्वर से ही वेद उत्पन्न हुवे हैं, किसी मनुष्य से नहीं, इधरने ही सृष्टि की आदि में अग्नि, वायु, आदित्य और अंगिरा इन चार मनुष्यों के द्वारा चार वेदों का प्रकाश किया है अर्थात् एक २ मनुष्य के द्वारा एक २ वेद को प्रगट किया है । वेदों में सब मंत्र छन्दों में हैं, परमेश्वर सर्व शक्तिमान है, वह सुख और प्राणादि साधनों के बिना भी शब्दरूप वेद उत्पन्न करसकता है ईश्वर को सब ज्ञान है, वह छन्द बना सक्ता है। वेदों में शब्द छन्द पद और वाक्य नित्य हैं, सृष्टि की आदि में ईश्वर इनको प्रगट करता है और प्रलय में यह वेद ज्यों के त्यों उसके ज्ञान में रहते हैं l

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