साहित्य और सिद्धांत | Sahitya Or Sidhant

साहित्य और सिद्धांत | Sahitya Or Sidhant

साहित्य और सिद्धांत | Sahitya Or Sidhant के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : साहित्य और सिद्धांत है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Shyamlakant Verma | Shyamlakant Verma की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 225 है | पुस्तक में कुल 55.8 MB पृष्ठ हैं |नीचे साहित्य और सिद्धांत का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | साहित्य और सिद्धांत पुस्तक की श्रेणियां हैं : literature

Name of the Book is : Sahitya Or Sidhant | This Book is written by Shyamlakant Verma | To Read and Download More Books written by Shyamlakant Verma in Hindi, Please Click : | The size of this book is 225 | This Book has 55.8 MB Pages | The Download link of the book "Sahitya Or Sidhant " is given above, you can downlaod Sahitya Or Sidhant from the above link for free | Sahitya Or Sidhant is posted under following categories literature |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 225
कुल पृष्ठ : 55.8 MB

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

साहित्य शब्द का जो अर्थ आज लिया जाता है वह सर्वथा नवीन है। अपने प्राचीन अर्थ में 'साहित्य' शब्द, उन सभी कृतियों का जिनमें शब्दों के साथ अर्थ की अभिव्यक्ति हो, बोध कराता था । अपने इसी गुणके कारण वह 'शब्दार्थ सहितौ कहलाता था । साहित्य शब्द का अँग्रेजी रूप 'Literature' भी अपने पूर्व रूप में इसी अर्थ का द्योतक था और उसकी उत्पत्ति Letters शब्द से हुई थी। Letter का अर्थ है अक्षर, और (Letters = अक्षरसमूह =) शब्द के साथ अर्थ का जुटा रहना स्वाभाविक ही है। गोस्वामी तुलसीदासजी ने गिरा-अर्थं को जल-बीचि-सम कहकर शब्द और अर्थ के सम्बन्ध को स्पष्ट किया है।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.