सर्प | Sarp

सर्प | Sarp

सर्प | Sarp के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : सर्प है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Unknown | Unknown की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 01.3 MB है | पुस्तक में कुल 49 पृष्ठ हैं |नीचे सर्प का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | सर्प पुस्तक की श्रेणियां हैं : Stories, Novels & Plays

Name of the Book is : Sarp | This Book is written by Unknown | To Read and Download More Books written by Unknown in Hindi, Please Click : | The size of this book is 01.3 MB | This Book has 49 Pages | The Download link of the book "Sarp" is given above, you can downlaod Sarp from the above link for free | Sarp is posted under following categories Stories, Novels & Plays |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 01.3 MB
कुल पृष्ठ : 49

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भारतवर्ष में कोई भी ऐ जगह न होगी जहाँ पर सर्प न पाये जाते हों । हिन्दू शास्त्र के अनुसार इनके उम्पत्ति अनन्त नाग में हुई। हैं जिनके सहस्र मस्तके हैं तथा जा पाताल में रहते हैं। शास्त्रों में यह कहा जाता है कि कश्यप ऋषि की बहुत-मा त्रियां थीं उन्हीं में से एक कद् थीं जिनसे इन नागों की सृष्टि हुई । ये नाग पाता । अपन राजा शेषनाग के माध वास करते हैं जो कि हिन्दूशास्त्र के अनुसार इस भमण्डल के अपने सहस्र मस्तक पर धारण किये हुए है। अभी तक हर एक हिन्दू-घर में नाग की पूजा नाना विधिया से मनाई जाती है ।

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