शनि महिमा ग्रन्थ | Shani Mahima Granth

शनि महिमा ग्रन्थ | Shani Mahima Granth

शनि महिमा ग्रन्थ | Shani Mahima Granth के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : शनि महिमा ग्रन्थ है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Shani Bhakt Manu Bhaiya Ji | Shani Bhakt Manu Bhaiya Ji की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 1.8 MB है | पुस्तक में कुल 133 पृष्ठ हैं |नीचे शनि महिमा ग्रन्थ का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | शनि महिमा ग्रन्थ पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm

Name of the Book is : Shani Mahima Granth | This Book is written by Shani Bhakt Manu Bhaiya Ji | To Read and Download More Books written by Shani Bhakt Manu Bhaiya Ji in Hindi, Please Click : | The size of this book is 1.8 MB | This Book has 133 Pages | The Download link of the book "Shani Mahima Granth" is given above, you can downlaod Shani Mahima Granth from the above link for free | Shani Mahima Granth is posted under following categories dharm |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 1.8 MB
कुल पृष्ठ : 133

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विदूषक से कह रहे हैं ‘काई भीमकाय मनुष्य या राक्षस उनकी तीनों कन्याओं को हरे लिये जा रहा है । यह अवसर भट्टजी को स्वप्नों की असारता और उनके उद्भव पर अपने विचार प्रकट करने को मिल गया। 'स्वप्न की सभी बातें असत्य होती हैं स्वप्न पर कौन विश्वास करता है, परन्तु स्वप्न का प्रभाव तो पड़ता ही है । जब अम्बा को स्वप्न का पता लगता है तो वह घबड़ा कर विदूषक से पुछती हैं कि क्या स्वप्न सच्चा होता है।' विदूषक उत्तर देता है कि कभी हो जाता है कभी नहीं ।' बस इस समय से उनके जीवन में एक विशेष परिवर्तन हो जाता है और वह कहती हैं कि 'विश्वास न होते हुए भी विश्वास करना ही होगा कि स्वप्न जागरण से भी अधिक भयानक होता है।

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