जैन रत्नाकर | Jain Ratnakar

जैन रत्नाकर | Jain Ratnakar

जैन रत्नाकर | Jain Ratnakar के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : जैन रत्नाकर है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Keshari Chand Sethiya | Keshari Chand Sethiya की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 3 MB है | पुस्तक में कुल 136 पृष्ठ हैं |नीचे जैन रत्नाकर का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | जैन रत्नाकर पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm

Name of the Book is : Jain Ratnakar | This Book is written by Keshari Chand Sethiya | To Read and Download More Books written by Keshari Chand Sethiya in Hindi, Please Click : | The size of this book is 3 MB | This Book has 136 Pages | The Download link of the book "Jain Ratnakar" is given above, you can downlaod Jain Ratnakar from the above link for free | Jain Ratnakar is posted under following categories dharm |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 3 MB
कुल पृष्ठ : 136

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पांच परमेष्ठियों की वन्दना करने की विधि इस पाठ में बतलाई गई है। वन्दना करने वाला वन्दना करते समय अपने दोनों हाथों को जोड़ कर तीन वार दांयी ओर से बांयी ओर प्रदक्षिणा करता है। वन्दना करता हूं । नमस्कार करता हूँ । सत्कार करता हूं । सम्मान करता हूं । आप कल्याणकारी हैं। मंगल करने वाले हैं। दैवत अर्थात् देवता के समान हैं। चैत्य-ज्ञानमय हैं अथवा चित्त को आह्लादित करने वाले हैं। मैं आपकी पर्यापासन अर्थात् सेवा करता हूँ और मस्तक से आपकी वृन्दना करता है।

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