शिव सहिंता हिंदी-संस्कृत | Shiv Sahinta Hindi-Sanskrit

शिव सहिंता हिंदी-संस्कृत | Shiv Sahinta Hindi-Sanskrit

शिव सहिंता हिंदी-संस्कृत | Shiv Sahinta Hindi-Sanskrit के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : शिव सहिंता हिंदी-संस्कृत है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Unknown | Unknown की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 16.7 MB है | पुस्तक में कुल 216 पृष्ठ हैं |नीचे शिव सहिंता हिंदी-संस्कृत का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | शिव सहिंता हिंदी-संस्कृत पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm

Name of the Book is : Shiv Sahinta Hindi-Sanskrit | This Book is written by Unknown | To Read and Download More Books written by Unknown in Hindi, Please Click : | The size of this book is 16.7 MB | This Book has 216 Pages | The Download link of the book "Shiv Sahinta Hindi-Sanskrit " is given above, you can downlaod Shiv Sahinta Hindi-Sanskrit from the above link for free | Shiv Sahinta Hindi-Sanskrit is posted under following categories dharm |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 16.7 MB
कुल पृष्ठ : 216

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

टीका-इसीतरह विधिनिषेध कर्मके जाननेवाले लोग पापकर्मसे रहित होके मोहमेंही पड़ते और जो मनुष्य पुण्यपापका अनुष्ठान पहिले जो मत कहा है उसके आसरे होके करते हैं उसका फल यह होता है कि, मनुष्य वारंवार संसार में जनमता और मरता है अर्थात् शुभाशुभ कर्म करनेसे कदापि मोक्ष नहीं होता परन्तु शुभकर्म करनेसे केवल चित्तकी शुद्धि होती है |

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.