सौंदर्य-विज्ञान | Soundarya Vigyan

सौंदर्य-विज्ञान | Soundarya Vigyan

सौंदर्य-विज्ञान | Soundarya Vigyan के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : सौंदर्य-विज्ञान है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Unknown | Unknown की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 2.8 MB है | पुस्तक में कुल 171 पृष्ठ हैं |नीचे सौंदर्य-विज्ञान का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | सौंदर्य-विज्ञान पुस्तक की श्रेणियां हैं : science

Name of the Book is : Soundarya Vigyan | This Book is written by Unknown | To Read and Download More Books written by Unknown in Hindi, Please Click : | The size of this book is 2.8 MB | This Book has 171 Pages | The Download link of the book "Soundarya Vigyan" is given above, you can downlaod Soundarya Vigyan from the above link for free | Soundarya Vigyan is posted under following categories science |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 2.8 MB
कुल पृष्ठ : 171

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

यह सब कुछ है, फिर भी मुझे किसी ऐसी प्राचीन पुस्तकका ज्ञान नहीं है जिसमें सौन्दर्यको तात्विक विवेचन किया गया हो। श्री हरिपशसिंहका प्रयास इस दृष्टिसे सर्वया प्रशंसनीय है। उन्होंने दिखलाया है कि सौन्दर्यकी अनुभूतिके लिए कौनसी परिस्यिति अनुकूल होती है द्रष्टा और दृश्यमें कौन कौन से गुण होने चाहिये। उन्होंने यह भी दिपछाया है कि और गुणोंके साथ साथ तन्मयता कितनी पड़ी अवश्यकता है और प्राच्य तथा पाश्चात्य विद्वानांके विचारोंका विश्लेषण तथा समन्वय करके यह स्पष्ट कर दिया है कि सौन्दर्यके भानुपही गुण चाहे जो हो, उसका मुख्य रूप यह है|

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.