यथार्थ गीता | Yathartha Geeta

यथार्थ गीता | Yathartha Geeta

यथार्थ गीता | Yathartha Geeta के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : यथार्थ गीता है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Unknown | Unknown की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 3.15 MB है | पुस्तक में कुल 429 पृष्ठ हैं |नीचे यथार्थ गीता का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | यथार्थ गीता पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm

Name of the Book is : Yathartha Geeta | This Book is written by Unknown | To Read and Download More Books written by Unknown in Hindi, Please Click : | The size of this book is 3.15 MB | This Book has 429 Pages | The Download link of the book "Yathartha Geeta" is given above, you can downlaod Yathartha Geeta from the above link for free | Yathartha Geeta is posted under following categories dharm |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 3.15 MB
कुल पृष्ठ : 429

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

श्रीकृष्ण जिस स्तर की बात करते हैं, क्रमशः चलकर उसी स्तर पर खड़ा होनेवाला कोई महापुरुष ही अक्षरशः बता सकेगा कि श्रीकृष्ण ने जिस समय गीता का उपदेश दिया था, उस समय उनके मनोगत भाव क्या थे? मनोगत समस्त भाव कहने में नहीं आते। कुछ तो कहने में आ पाते हैं, कुछ भाव-भंगिमा से व्यक्त होते हैं और शेष पर्याप्त क्रियात्मक हैं- जिन्हें कोई पथिक चलकर ही जान सकता है। जिस स्तर पर श्रीकृष्ण थे, क्रमश: चलकर उसी अवस्था को प्राप्त महापुरुष ही जानता है कि गीता क्या कहती है।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.