भाषा-विज्ञान | Bhasha Vigyan

भाषा-विज्ञान | Bhasha Vigyan

भाषा-विज्ञान | Bhasha Vigyan के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : भाषा-विज्ञान है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Unknown | Unknown की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 33.5 MB है | पुस्तक में कुल 375 पृष्ठ हैं |नीचे भाषा-विज्ञान का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | भाषा-विज्ञान पुस्तक की श्रेणियां हैं : science

Name of the Book is : Bhasha Vigyan | This Book is written by Unknown | To Read and Download More Books written by Unknown in Hindi, Please Click : | The size of this book is 33.5 MB | This Book has 375 Pages | The Download link of the book "Bhasha Vigyan " is given above, you can downlaod Bhasha Vigyan from the above link for free | Bhasha Vigyan is posted under following categories science |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 33.5 MB
कुल पृष्ठ : 375

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

चिरकाल से मेरी यह धारणा रही है कि अपनी मातृभाषा की उन्नति किये विना जातीय दुरवस्था को सुधार नहीं हो सकता । मातृभाषा को अपनाये विना साधारण जनता और शिक्षितों के बीच में जो बड़ी खाई पाई जाती है वह दूर नहीं हो सकती, और इसके विना समता और जातीयता के भाव का संचार असंभव है। इंग्लैण्ड आदि उन्नतिशील देशों के निवास और भ्रमण से मेरी उक्त धारणा में और भी दृढ़ता आ गई।अपनी अपनी मातृभाषा के अपनाने से ही उन उन देशों में, पुरोहिताई, ज़मीन्दारी, वाणिज्य आदि |

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.