सामी और मुश्किलों से भरी घडी | Sami And The Time Of The Troubles

सामी और मुश्किलों से भरी घडी : फ्लोरेंस पैरी, जूडिथ गिलिलेंड | Sami And The Time Of The Troubles : Florence Parry, Judith Gililand

सामी और मुश्किलों से भरी घडी : फ्लोरेंस पैरी, जूडिथ गिलिलेंड | Sami And The Time Of The Troubles : Florence Parry, Judith Gililand के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : सामी और मुश्किलों से भरी घडी है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Arvind Gupta | Arvind Gupta की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 3.01 MB है | पुस्तक में कुल 35 पृष्ठ हैं |नीचे सामी और मुश्किलों से भरी घडी का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | सामी और मुश्किलों से भरी घडी पुस्तक की श्रेणियां हैं : children, history, inspirational, Stories, Novels & Plays, world

Name of the Book is : Sami And The Time Of The Troubles | This Book is written by Arvind Gupta | To Read and Download More Books written by Arvind Gupta in Hindi, Please Click : | The size of this book is 3.01 MB | This Book has 35 Pages | The Download link of the book "Sami And The Time Of The Troubles" is given above, you can downlaod Sami And The Time Of The Troubles from the above link for free | Sami And The Time Of The Troubles is posted under following categories children, history, inspirational, Stories, Novels & Plays, world |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी : , , , ,
पुस्तक का साइज : 3.01 MB
कुल पृष्ठ : 35

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

पट परा घाट काट पितत तुला (१5 पाए दा परा0त जि िएा (09६ ता 51511 ता तार 10 102 फिट) लि कर एाट ९ काजल (जाए 00 पर हा करतऊ जिन शत 9 कातिल फरट छिप एड टिड व 10 5वा ं ुफाड ड पट कताए पा पडटते 0 6िट ता जाए छानातनिधिटा चित तार पीवां तक ुफाइ 15 घाट फानप वा ते 9िलणिट पीट घाट 0 पीट पठपाजट 5. ५ फरार टा 00ॉएटते जञां कि पिला आते डर पल लकते पा चता। फलाटा ७ घट इाट डीाट दाल 1 वाट डीट 5 पाए व पार शिविटा सात प8ां फट छा पटल 5लट पिंड शिलट बुछुशाए जा पिटवा पड भछाएट ४ छाशातशिधाला छ00६ वार ाएाटा 5 पता पा कततड मा नटटातटा 0 5810 8 एटतला पाए पाएिटा टालते छा डीट ुुएद८ 50 50५१५ वां 1 (001 इवाएटए 10 काला पल फपिएट फिणाफिड लाए फट छुए 0 पता डिटा? जी 15 0 उससतलावा जछााला फट तार दर पता कं र पिछली बार जब कुछ दिन शांति थी तब एक दिन दादाजी मुझे और मेरी बहन को पिकनिक पर समंदर के किनारे ले गए. माँ भी साथ में थी. सूरज तेज़ गरम और चमकदार था और उस दिन हमने रेत में किले बनाये. पहले भी ऐसा ही होता था सामी दादाजी ने मुझे उस दिन बताया. लड़ाई से पहले रोजाना ही ऐसा शांत माहौल होता था. माँ ने दादाजी की ओर देखा और अपना सर हिलाया. अब पहले जैसे हालात कभी वापिस नहीं आयेंगे माँ ने कहा. मुझे पता था की वो मेरे पिताजी के बारे मैं सोच रहीं थीं. शायद हम अब कभी भी पिताजी की आवाज़ नहीं सुन पाएंगे और न ही कभी उनका चेहरा देख पाएंगे. दादाजी ने माँ का हाथ पकड़ा और कहा वो एक दुरघटना थी उनहोंने कहा. दुरघटना माँ ने रोते हुए कहा. वो इतनी धीमे आवाज़ में बोलीं की मुझे कुछ सुनाई ही नहीं दिया. कया बाज़ार में बमब रखे जाते हैं - जहाँ सैकड़ों लोग रोजाना आते-जाते हैं? अगर इस तरह बमब से मौत हो तो वो कोई दुरघटना नहीं होती

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.