राजेन्द्र प्रसाद आत्मकथा | Rajendra Prasad Atamkatha

राजेन्द्र प्रसाद आत्मकथा | Rajendra Prasad Atamkatha

राजेन्द्र प्रसाद आत्मकथा | Rajendra Prasad Atamkatha के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : राजेन्द्र प्रसाद आत्मकथा है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Unknown | Unknown की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 32.5 MB है | पुस्तक में कुल 694 पृष्ठ हैं |नीचे राजेन्द्र प्रसाद आत्मकथा का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | राजेन्द्र प्रसाद आत्मकथा पुस्तक की श्रेणियां हैं : Biography

Name of the Book is : Rajendra Prasad Atamkatha | This Book is written by Unknown | To Read and Download More Books written by Unknown in Hindi, Please Click : | The size of this book is 32.5 MB | This Book has 694 Pages | The Download link of the book "Rajendra Prasad Atamkatha" is given above, you can downlaod Rajendra Prasad Atamkatha from the above link for free | Rajendra Prasad Atamkatha is posted under following categories Biography |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 32.5 MB
कुल पृष्ठ : 694

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

संयुक्त प्रान्त में कोई जगह अमोढा नाम की है। सुनते है कि वहाँ कायस्थो की अच्छी बस्ती है। बहुत दिन बीते, वहाँ से एक परिवार निकलकर पूरब चला और बलिया में जाकर बसा। एक बडे जमाने तक बलिया में रहने के बाद उस परिवार की एक शाखा उत्तर की ओर गई और आजकल के जिला सारन (बिहार) के एक गाँव जीरादेई में जाकर रहने लगी। दूसरी शाखा गया मे जाकर बस गयी। जीरादेई-शाखा के कुछ लोग वहाँ से थोड़ी ही दूर पर एक दूसरे गाँव में भी जाकर बस गये । जीरादेईवाला परिवार ही मेरे पूर्वजो का परिवार है। शायद जीरादेई में आनेवाले मेरे पूर्वज मुझसे सातवी या आठवी पीढी मे ऊपर थे।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.