हमने कीटाणुओं के बारे में कैसे जाना | How Did We Find About Germs

हमने कीटाणुओं के बारे में कैसे जाना : इसाक असिमोव | How Did We Find About Germs : Isaac Asimov

हमने कीटाणुओं के बारे में कैसे जाना : इसाक असिमोव | How Did We Find About Germs : Isaac Asimov के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : हमने कीटाणुओं के बारे में कैसे जाना है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Arvind Gupta, Isaac Asimov | Arvind Gupta, Isaac Asimov की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : , | इस पुस्तक का कुल साइज 4.2 mB है | पुस्तक में कुल 33 पृष्ठ हैं |नीचे हमने कीटाणुओं के बारे में कैसे जाना का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | हमने कीटाणुओं के बारे में कैसे जाना पुस्तक की श्रेणियां हैं : science, scientist

Name of the Book is : How Did We Find About Germs | This Book is written by Arvind Gupta, Isaac Asimov | To Read and Download More Books written by Arvind Gupta, Isaac Asimov in Hindi, Please Click : , | The size of this book is 4.2 mB | This Book has 33 Pages | The Download link of the book " How Did We Find About Germs" is given above, you can downlaod How Did We Find About Germs from the above link for free | How Did We Find About Germs is posted under following categories science, scientist |


पुस्तक के लेखक : ,
पुस्तक की श्रेणी : ,
पुस्तक का साइज : 4.2 mB
कुल पृष्ठ : 33

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

दरअसल वो तैरती चीजें बहुत छोटी थीं - एक इंच के पचासयें हिस्से से भी छोटी। फिर भी वो तैर रही थी और चीजों को खा रही थीं। वो जिन्दा थों और उन्हें माइक्रोस्कोप के बिना देख पाना सम्भव नहीं था। इतनी छोटी छोटी जीवित चीजें भी हो सकती हैं - लेविनहुक से पहले किसी ने इस बात की कल्पना तक नहीं की थी।
ऐसे छोटे जीवों को जिन्हें माइक्रोस्कोप के बिना देख पाना असाभव है। को हम 'माइक्रोआरगैनिम' या 'सूक्ष्मजीवी' कहते हैं। लेविनक, सूक्ष्मजीवी देखने वाले पहले इंसान थे। सूक्ष्मजीव दरअसल ‘सिगल सेल' यानि एक-कोशिका के बने होते हैं - जिसमें जीवित पदार्थ के चारों ओर एक झिल्ली होती है। मनुष्य का शरीर ऐसी करोड़ों-अरबों कोशिकाओं (सेल्स) से बनता है।
लेविनहुक ने जिन सूक्ष्मजीवियों को देखा उनका बरताव काफी कुछ जानवरों जैसा था। इसलिए उन्हें छोटे जानवर या जीव माना गया।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.